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जानें आखिर कौन तैयार करता है बजट, इस साल क्या होंगी बड़ी चुनौतियां

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आप सभी जानते ही होंगे ये हमारे देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं। जब से इन्होने अपना पद संभाला तभी से इन्हें कई सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आगे भी कई चुनौतियां है। दरअसल हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह पहला मौका होगा कि वो एक साल के अंदर ही दो बजट पेश करेंगी। फरवरी महीने के पहले दिन ही पेश किए जाने वाले इस बजट 2020 में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना होगा। पिछले साल जून माह से जब उन्होंने वित्त मंत्री का पदभार संभाला है, तब से लेकर अभी तक भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत कुछ खास नहीं है जिसकी वजह से इसपर कई सारी बातें भी हो रही है।

ये हैं वो चुनौतियां

अब इनके सामने इस साल कई सारी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जैसे कि इस साल DIPAM अपना लक्ष्य पूरा करने से बहुत दूर है। जिसकी वजह से वित्त मंत्रालय का यह विभाग अपने टार्गेट से काफी दूर है। इसके पहले लगातार दो वित्तीय वर्ष में ​इस विभाग ने अपना लक्ष्य आसानी से पूरा कर लिया था। अभी तक इस विभाग ने विनिवेश से केवल 18,022 करोड़ रुपये ही जुटाने में कामयाब रहा है।

दूसरा लक्ष्य सरकारी बैंकों में NPA को लेकर है जो कि RBI और केंद्र सरकार अलग-अलग बातें रख रहे है। एक तरफ RBI का कहना है कि सितंबर महीने तक सरकारी बैंकों का NPA यानी फंसा कर्ज 9.9 फीसदी तक बढ़ जाएगा।

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वहीं कहा जा रहा है कि इस साल इंडस्ट्रीज को दिए जाने वाले लोन में भी 2.4 फीसदी की गिरावट रही है। नवंबर महीने में कृषि और इससे संबंधित कामों से लेकर सर्विस सेक्टर के क्रेडिट में गिरावट आई है। बजट के बाद रिटायर होने वाले राजीव कुमार को इस बात पर ध्यान देना होगा कि इसमें आगे ​और गिरावट न हो।

बताते चलें कि अपने खराब वित्तीय स्थिति की वजह से पिछले महीने ही वित्त मंत्रालय ने अंतिम तिमाही में होने वाले खर्च पर कैप लगा दिया। मंत्रालय ने इसमें 3 से 8 फीसदी तक कटौती करते हुए सभी विभागों और मंत्रालयों को कहा कि वो इस कटौती को ध्यान में रखतें हुए ही खर्च करें। इस बार बजट में इस बात की उम्मीद की जा रही है कि सरकार इनकम टैक्स में कटौती कर सकती है। 30 नवंबर तक, सरकार के खर्च और रेवेन्यू के बीच का अंतर बढ़कर 8.07 ट्रिलियन रुपये हो गया है जबकि, सरकार ने इसे 7.03 ट्रिलियन रुपये रहने का लक्ष्य रखा था।

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